आजकल भोपाल के एक केस की पुरे देश में बहुत चर्चा हो रही है और जोर शोर से बेटी बचाओ बेटी बचाओ गुंज रहा है और दहेज प्रथा को इसका मुल कारण माना जा रहा है, चलिए ठीक है लेकिन हमें यह भी देखना चाहिए कि आखिर आज भी हमारे समाज में दहेज़ प्रथा चल क्यों रही है सिर्फ दहेज़ मांगने वाले लोगों के कारण या दहेज़ देने वालों के कारण जो अपनी बेटियों के लिए अमिर दामाद खरीदने की कामना करते हैं।
और क्या आज समाज में रिवर्स दहेज़ नहीं चल रहा है,जी हां मैं तलाक के बाद महिलाओं को मिलने वाली मोटी रकम जीसे कानुनी भाषा में एल्युमनी, मेंटेनेंस उसकी बात कर रहा हूं क्या यह सीधे तौर पर रिवर्स दहेज़ प्रथा नहीं है। क्या इस रिवर्स दहेज़ के कारण बेटे आत्महत्या नहीं कर रहे हैं क्या रिवर्स दहेज़ लोभी महिलाओं और उनके परिवारों के कारण लड़के आत्महत्या नहीं कर रहे हैं उनके परिवार नहीं उजड़ रहे हैं।
हर बार किसी बेटी की मौत पर बेटी बचाने की गुहार लगाने वाले लोग क्या बेटों को नहीं बचाना चाहते।बेटे भी बचाइए बेटे न तो गुगल से डाऊनलोड होते हैं और ना ही एआई से जनरेट होते हैं उन्हें भी माएं ही जन्म देती हैं।
एक बेटे को आत्महत्या के लिए उकसाने वाली पत्नी या पूर्व पत्नी और उसका परिवार भी उतना ही बड़ा गुनहगार है जीतना बड़ा एक बेटी को आत्महत्या के लिए उकसाने वाला उसका पति या पूर्व पति और उसका परिवार।
अब समय है कि अपराध को अपराध की तरह देखा जाना चाहिए उसे बेटी और बेटे के सांचे में ढालकर नहीं।
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